भारतीय दंड संहिता १८६०, अध्याय २, साधारण स्पष्टीकरण :

Posted  on 2015-11-16
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Indian Penal Code,1860 in Hindi भारतीय दंड संहिता १८६० हिंदी में
भारतीय दंड संहिता १८६०, अध्याय २, साधारण स्पष्टीकरण :
भारतीय दंड संहिता १८६०, धारा ६ :, संहिता में की परिभाषाओं का अपवादों के अध्यधीन समझा जाना
इस संहिता में अपराध की हर परिभाषा, हर दण्ड उपबंध और हर ऐसी परीभाषा या दण्ड उपबन्ध का हर दृष्टांत, "साधारण अपवाद" शीर्षक वाले
अध्याय में अन्तर्विष्ट अपवादों के अध्ययीन समझा जाएगा, चाहे उन अपवादों को ऐसी परिभाषा, दण्ड उपबन्ध, या दृष्टांत में दुहराया न गया हो।

भारतीय दंड संहिता १८६०, धारा ७ :, एक बार समझाया अभिव्यक्ती या पद का भाव :
इस संहिता के किसी भी भाग में(धारा में) समझाया गया हर पद या अभिव्यक्ती का स्पष्टीकरण इस संहिता के अनुरुप ही प्रयोग किया गया है।

भारतीय दंड संहिता १८६०, धारा ८:, लिंग :
"वह" या पुिल्लग वाचक शब्द का प्रयोग जहा किए गए है, वे हर व्यक्ती चाहे नर हो या नारी के बारें में लागू है।

भारतीय दंड संहिता १८६०, धारा ९:, वचन :
जब तक संदर्भ से तत्प्रतिकूल प्रतीत न हो, एकवचन शब्दों के अन्तर्गत बहुवचन आता है, और बहुवचन शब्दों के अन्तर्गत एकवचन आता है।

भारतीय दंड संहिता १८६०, धारा १०:, "पुरुष","स्त्री" :
"पुरुष" शब्द किसी भी आयु के मानव नर का सुचित करना है;"स्त्री" शब्द किसी भी आयु की मानव नारी का सुचित करना है।

भारतीय दंड संहिता १८६०, धारा ११:, "व्यक्ती" :
कोई भी कंपनी या संस्था, या व्यक्ती निकाय चाहे वह निगमित हो या नहीं,"व्यक्ती" शब्द के अन्तर्गत आता है।

भारतीय दंड संहिता १८६०, धारा १२: ,"लोक"(जनता) :
लोक(जनता) का कोई भी वर्ग या कोई भी समुदाय"लोक"(जनता) शब्द के अन्तर्गत आता है।

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